Best 95+ Ramzan ka Pehla Jumma Mubarak Shayari

आज मैं यहाँ पर रमजान का पहला जुम्मा मुबारक शायरी (Ramzan ka Pehla Jumma Mubarak Shayari) लेकर आया हूँ |

रमजान का महिना एक मुसलमान भाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण महिना होता है जिसमें वह रोजे रखता है | रमज़ान महीने के पहले शुक्रवार को पहला जुम्मा होता है |

यदि आप रमज़ान का पहला जुम्मा मुबारक पर शायरी ढूंढ रहे है तो आप सही जगह आए है | यहाँ पर रमज़ान के पहले जुम्मे की मुबारक बात कहने की मस्त-मस्त शयरियाँ लिखी गयी है | आप इन जुम्मा मुबारक शायरी को कॉपी पेस्ट करके अपने से बड़े परिवार के लोगो को जुम्मा मुबारक बोल सकते है |

Ramzan ka Pehla Jumma Mubarak Shayari

रमजान का पहला जुम्मा मुबारक शायरी (Ramzan ka Pehla Jumma Mubarak Shayari)

पूरा जीवन बीत जाएँ ख़ुदा की बंदगी में,
पाँचों वक्त का नमाज अदा करू जिंदगी में.
रमजान का पहला जुम्मा मुबारक हो |

ऐ ख़ुदा मौका देना सफर-ए-मक्का का,
सुना है जन्नत जैसा नजारा है वहाँ का.
जुम्मा मुबारक |

ख़ुदा के सजदें में जब मैं सिर को झुकाता हूँ,
मैं अपने सारे दुःख-दर्दों का हल पाता हूँ |

ए खुदा मौका देना मुझे भी,
सफर-ऐ- मक्का जाने का,
सुना है वहां की गई इबादत से,
नए की झलक दिखाई देती है |

ए खुदा मेरे यार की मांगी हुई हर दुआ कबूल कर दे,
अपनी रहमतो से उसकी खुशियो की झोली भर दे |

मनवा लेना हर बात आज अपने खुदा से,
क्योकि आज बड़ा ही प्यारा दिन है,
पहला जुम्मा भी है और रमजान भी |

रमजान के पहले जुम्मा मुबारक की शायरी

अपने रब पर हमेश भरोसा रखा करो,
क्यू के अल्लाह वो नहीं देता जो हमें अच्छा लगता है,
वो वही देता है जो हमारे लिए अच्छा होता हे |

मेरी खाली झोली में दुआ के अल्फाज़ डाल दो,
क्या पता तुम्हारे होठ हिले और मेरी तकदीर संवर जाए.
जुम्मा मुबारक |

वो चमक चाँद में है न सितारों में हैं,
जो मदीने के दिलकश नजारों में हैं,
बेजुबान पत्थरों को भी बख्श दी जुबान
इतनी ताकत मेरे नबी के इशारों में हैं |

ख़ुदा की रहमत सभी पर बरसे,
दो वक्त की रोटी के लिए कोई न तरसे |

ए खुदा इस रमजान लोगो के दिलो में अमन जगा दे,
लोगो के दिलो से अहंकार और क्रोध को मिटा दे |

आज रमजान के पहले जुम्मे ने भी खूब रंग सजा रखा है,
अरे इधर तो आओ यार नाराजगी में क्या रखा है |
जुम्मा मुबारक हो |

रमजान का पहला जुम्मा मुबारक शायरी

रमज़ान पहला जुम्मा मुबारक शायरी

इस जुम्मे में आपकी दुआएं हो जाएगी कबूल,
एक बार खुदा के सजदे में दिल तो लगाओ |

आज है रमजान का पहला जुम्मा,
अल्लाह हम सब की दुआएं कुबूल करना |

नेक नियत से किसी काम का आगाज करो,
फिर मदद करने के लिए फ़रिश्ते भी चले आएंगे |

कह दो अल्लाह के सिवा कोई महबूब नही,
और रमजान के पहले जुम्मे से प्यारा कोई दिन नही |

तेरी मोहब्बत का मुझ पर यूं असर हुआ है,
जुम्मे की नवाज अदा करने के लिए मैंने,
मस्जिद का दरवाजा छुआ है |

सारे गिले शिकवे भूलाकर हम,
सबसे इबादत-ऐ-सुकून अदा,
करते है चलो तबस्सुम सी फज्र,
में रमजान मुबारक कहते है |

रमजान का पहला जुम्मा मुबारक उर्दू शायरी

کیوں ڈھونڈتا ہے انسان راحت “دنیا”میں
جب کے سارے مسئلے کا حَل “نماز”ہے .

توبہ کی امید پر ہو چکے بہت گناہ یا رب ،
مہلت تو مل رہی ہے توفیق بھی عطا فرما ،
آمین

بڑھی عجیب ہے نادان دِل کی خواہش یا رب
عمل کچھ نی اور دِل طلبگار ہے جنت کا !
جمعہ مبارک

अंतिम दो लाइन

आज मैंने यहाँ पर रमजान का पहला जुम्मा मुबारक शायरी (Ramzan ka Pahla Jumma Mubarak Shayari) आपके लिए प्रस्तुत की है | आपको ये जुम्मा मुबारक शायरियाँ जरूर पसंद आएगी |

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